सहारनपुर का गीत

सहारनपुर की शान में सुशान्त सिंहल द्वारा रचित गीत

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सबसे प्यारा, सबसे न्यारा, सहारनपुर ये जिला हमारा।

उत्तर में हिमवान यहां पर, गंगा-यमुना का कल-कल स्वर ।
शस्य श्यामला धरा यहां की, सबको देती आंचल भर-भर ।
जो भी आता यही है कहता, यहां से जाना नहीं गवारा ॥१॥

मुगल काल से ख्याति पायी, अकबर ने मुद्रिका चलायी ।
अंग्रेज़ों को ऐसा भाया, काष्ठ कला लंदन पहुंचायी ॥
कला यहां की मोहित करती, जग करता गुणगान हमारा ॥२॥

स्वतंत्रता की बलिवेदी पर, परवानों ने प्राण चढ़ाये।
भारत मां को मुक्त कराने, दीवानों ने शीश कटाये।
देख धरा को संकट में, वीर यहां देते हुंकारा ॥३॥

शाकुंभर सा तीर्थ यहां पर, जीवनदाता हैं भूतेश्वर।
पीर यहां के बड़े प्रतापी, जो भी मांगो, देते हैं वर।
बागेश्वर के दर्शन पाकर, सुन्दर हो जाता दिन सारा॥४॥

पावन शबद सुनाते ग्रंथी, जिन मुनियों की अमृत वाणी।
वेद ऋचायें गूंजें नभ में, मस्जिद की अजान सुहानी ।
पावन कर देती तन-मन को, आशा का फैले उजियारा ॥५॥

शाह कमाल की धरती है ये, धरा लालदास बाबा की।
जिन दोनों के प्रेम की गाथा, धरती के कण-कण में लिक्खी ॥
यही प्रेम हम सब को जोड़े, यही प्रेम आदर्श हमारा ॥६॥

देवबन्द सा केन्द्र यहां पर, जहां से शिक्षा पाता जग भर।
यहां की माड़ी, यहां के कूंचे, गुण गाते हैं अवनी-अंबर।
बस्ती अपनी, गलियां अपनी, ये तो है परिवार हमारा ॥७॥

इस नगरी की शान बढ़ायें, इसको आलीशान बनायें।
पुरखों से जो पाया हमनें, अपने बच्चों को सिखलायें।
जो दे सकते, दे जायें हम, यही है शुभ संकल्प हमारा ॥८॥

– सुशान्त सिंहल

नोट :  इस गीत को प्रसिद्ध गायक एवं संगीतकार श्री संजीव झिंगरन ने स्वरबद्ध भी किया है।  हम प्रयास करेंगे कि उनकी वाणी में गाये गये इस गीत को आप तक शीघ्र ही पहुंचा सकें !

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