फोटोग्राफी कार्यशाला से पुस्तक मेले का सफल आगाज़

द सहारनपुर डॉट कॉम की कार्यशाला में 124 प्रशिक्षुओं ने सहभागिता की !

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सहारनपुर – 29 नवंबर –  द सहारनपुर डॉट कॉम द्वारा आयोजित फोटोग्राफी कार्यशाला की अपार सफलता से आज सहारनपुर पुस्तक मेले का सफल शुभारंभ हो गया।  पुस्तक मेले में आयोजित किये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की श्रंखला में इस कार्यशाला के आयोजन का दायित्व द सहारनपुर डॉट कॉम पर था और 124 प्रशिक्षु व 5 प्रशिक्षकों ने इस कार्यशाला को एक स्मरणीय आयोजन बना दिया।

received_10205848142346677कार्यशाला का उद्घाटन शिवालिक बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व प्रबन्ध निदेशक श्री सुवीर कुमार गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि आजकल हम जैसे शौकिया फोटोग्राफर अपने परिवार के साथ कहीं घूमने जाते हैं तो कैमरे के स्थान पर मोबाइल कैमरे से ही फोटो खींचने लगे हैं ताकि उनको तुरन्त सोशल मीडिया पर अपने मित्रों के साथ शेयर भी कर सकें। पर फोटो चाहे मोबाइल से खींचें, चाहे डिजिटल एस.एल.आर. से, फोटोग्राफी का प्रशिक्षण हमारे चित्रों को बहुत बेहतर बना देता है। हमें पता चलता है कि हम कहां और क्या गलती कर रहे हैं जिससे अगली बार हम वही गलती दोबारा नहीं करते। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं भी फोटोग्राफी सुशान्त सिंहल जी से ही सीखी है और उसके बाद एक डिजिटल एस.एल.आर. कैमरा खरीदा और अपने फोटो की गुणवत्ता में बहुत अन्तर अनुभव किया। उन्होंने द सहारनपुर डॉट कॉम से अपेक्षा की कि इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर निरन्तर चलते रहने चाहियें।

प्रथम सत्र में सुशान्त सिंहल ने फोटोग्राफी के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि फोटो खींचना और फोटो खिंचवाना न केवल एक बेहतरीन हॉबी है, बल्कि फोटो खिंचवाना और खींचना अत्यन्त आकर्षक कैरियर भी हैं। पहले फोटो खिंचवाने की बात करें तो कह सकते हैं कि यदि फोटोग्राफर नहीं है तो न मॉडलिंग होगी, न कोई हीरो होगा, और न ही कोई हीरोइन होगी। अमिताभ बच्चन और एश्वर्य राय से हम सब यदि परिचित हैं और वह हमें प्रिय लगते हैं तो इसका श्रेय फोटोग्राफी को ही है।
received_10205848140066620यदि आप अच्छे फोटोग्राफर हैं तो अनेकानेक सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों को आपकी जरूरत है। पूरा फिल्म व टी.वी. उद्योग फोटोग्राफी पर ही टिका हुआ है। समाचार पत्र, पत्रिकाएं व पुस्तकें जिस ऑफसेट तकनीक से प्रकाशित की जाती हैं, वह भी फोटोग्राफी पर ही आधारित है। बीमार का हाल जानने के लिये भी जिस एक्स रे, अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन का उपयोग किया जाता है, वह भी फोटोग्राफी पर ही आधारित है। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में अनेकानेक उपग्रह भेजे हुए हैं ताकि वह अंतरिक्ष से धरती के चित्र लेकर भेजते रहें। इंफ्रारेड फोटोग्राफी के सहारे धरती के अन्दर के चित्र लिये जा रहे हैं। यदि आप सिर्फ शौकिया स्तर पर फोटोग्राफी करना चाहते हैं तो भी आप अच्छे चित्र खींच कर कलेंडर, पोस्टर, ग्रीटिंग कार्ड बनाने वाले प्रकाशकों को अपने चित्र बेच सकते हैं। लेख, कविताएं, कहानियां लिखते हैं तो समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में प्रकाशन हेतु साथ में उपयुक्त चित्र भी भेज सकते हैं। आप अपने चित्रों की प्रदर्शनी लगा कर लोकप्रियता ही नहीं, अपनी कलात्मक कृतियों के लिये गुणग्राहक भी ढूंढ सकते हैं।

इसके पश्चात्‌ सुशान्त सिंहल ने बताया कि फोटोग्राफी 50% विज्ञान है और 50% कला है। इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि कैमरे के दो कार्य हैं – पहला, बाहर के दृश्य की छवि कैमरे के अन्दर व्यू फाइंडर पर दिखाना और दूसरा, उस दृश्य को स्थाई स्वरूप देने के लिये फिल्म, टेप या मैमोरी चिप पर सुरक्षित करना। हमें कौन सा दृश्य चाहिये, चित्र में क्या दिखाना है और क्या नहीं दिखाना है, किस एंगिल से दिखाना है, कैमरे का शटर किस क्षण दबाना है, प्रकाश किस दिशा से, किस एंगिल से, किस रंग का और कितनी मात्रा में आना चाहिये, कैमरा कहां पर होना चाहिये, कैमरा स्थिर रखना है या पैन करना है – ये सारे निर्णय कला क्षेत्र में आते हैं जिनको हमारे भीतर बैठा हुआ फोटो आर्टिस्ट लेता है।

रही बात साइंस की तो, कैमरे में कितना एपर्चर रखना है, शटर स्पीड कितनी रखनी है, ISO स्पीड कितनी रखी जानी चाहिये, White balance कहां सैट किया जाना चाहिये, ये सारे निर्णय आपके भीतर मौजूद फोटो टैक्नीशियन लेता है। एक अच्छा फोटोग्राफर बनने के लिये आपको एक अच्छा फोटो टैक्नीशियन और एक अच्छा फोटो आर्टिस्ट बनना होता है। अच्छा फोटो टैक्नीशियन आप एक महीने के प्रशिक्षण से ही बन जायेंगे किन्तु कला का प्रशिक्षण तो कई साल की साधना मांगता है।

202अगले सत्र में प्रसिद्ध फोटोग्राफर अमित कक्कड़ ने कैमरे के तकनीकी पक्षों की जानकारी दी तथा ISO speed, Shutter speed और Aperture के अन्तर्सम्बन्धों की जानकारी दी व अपने बेहतरीन चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया कि किस प्रकार एपरचर और शटर स्पीड बदल कर न केवल आप सैंसर तक पहुंचने वाले प्रकाश की मात्रा पर नियंत्रण कर सकते हैं बल्कि भिन्न – भिन्न इफेक्ट प्राप्त कर सकते हैं !

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received_10207919896025074तृतीय सत्र मनोज सिंह के नाम रहा जिसमें उन्होंने फोटोग्राफी में प्रकाश की महत्ता को प्रतिपादित किया। उन्होंने बताया कि प्रकाश की मात्रा, चमक (brightness), तीखापन (contrast), दिशा (direction) व कोण (Angle) बदल देने से चित्र बदल जाता है। उन्होने प्रशिक्षुओं को सुझाव दिया कि वह अपने घर में प्रकाश की दिशा व कोण बदल – बदल कर चित्र लें और देखें कि किस प्रकार के प्रकाश में वह अच्छे चित्र ले पा रहे हैं।

इससे अगले सत्र में डा. विवेक बैनर्जी ने, जो न केवल एक सफल बाल रोग विशेषज्ञ हैं बल्कि एक लोकप्रिय उपन्यासकार व कथाकार भी हैं, ग्राफिक्स व चित्रों की सहायता से composition अर्थात्‌ चित्र के भीतर मौजूद विभिन्न elements के अन्तर्सम्बन्धों को समझाया और बताया कि किस प्रकार मामूली सा परिवर्तन कर देने से चित्र सामान्य से अति विशिष्ट बनाया जा सकता है।208 उन्होंने बताया कि हमारे हाथ में चाहे पेंसिल हो, ब्रश हो या कैमरा, हम त्रिआयामी वास्तविकता (three-dimensional reality) का आभास द्विआयामी (two-dimensional) कागज़ या कैनवस पर देना चाहते हैं। lines, simplicity, balance, shapes, colours के सहारे हम ऐसा कर पाते हैं।

received_10205848132186423कार्यशाला के अन्तिम सत्र में पाइनवुड के कंप्यूटर प्राध्यापक मिदुन ने डिजिटल फोटो को सुधारने में प्रयोग होने वाले विभिन्न कंप्यूटर एप्लिकेशन का वर्णन किया और बताया कि पिछले दशक के फोटोग्राफी डार्करूम अब हमारे लैपटॉप और डेस्कटॉप में सिमट कर रह गये हैं। वे सभी कार्य जो कभी डार्करूम में फोटोग्राफर किया करते थे, वह तो अब हम कंप्यूटर पर कर ही सकते हैं, बल्कि उससे भी अधिक कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि इस कार्यशाला के प्रशिक्षुओं के लिये सहारनपुर पुस्तक मेले के दौरान एक फोटोग्राफी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जारहा है जिसका विषय रहा गया है – “पुस्तक मेला – जैसा मैने देखा” ! इस प्रतियोगिता के लिये प्रतिभागियों से 20 से 25 की संख्या में चित्र श्रंखला (फोटो फीचर) आमंत्रित किये गये हैं। सर्वश्रेष्ठ 3 फोटो फीचर को पुरस्कृत किये जाने की घोषणा की गई।

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कार्यशाला के समापन से पूर्व प्रशिक्षुओं ने भी अपने बेबाक विचार रखे। आर्ट ऑफ लिविंग की प्रशिक्षिका शील शर्मा ऐरन, इन्द्रजीत सिंह, डा. अरुण अनेजा, डा. संदीप शर्मा, के.के. गर्ग, अशोक कुमार वर्मा, राज कुमार जैन, संजय गुप्ता, कमलेश अग्रवाल ने फोटो कार्यशाला को बहुत उपयोगी बताया और अगले सत्र की प्रतीक्षा करने की बात कही। सभी शिक्षकों को आभार सहित कार्यशाला संपन्न हुई।

कार्यशाला की सफलता में Shri Arimardan Gaur, Mr. Manish Kachhal​, Mr. Gagan Deep​, Ms. Priyanka Tyagi तथा Mr. Danish Asad का विशेष योगदान रहा। इस कार्यशाला में जहां एक ओर कमलेश कुमार अग्रवाल जैसे 68 वर्ष के प्रशिक्षु बहुत उत्साह के साथ शामिल हुए वहीं विभिन्न विद्यालयों से आये छात्र-छात्राओं में 14 वर्ष के युवा भी भारी संख्या में उपस्थित थे!

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