पांवधोई तट पर लगा बैसाखी मेला

सहारनपुर वासियों ने पांवधोई गंगा में डुबकी लगाई और बच्चों का मुंडन कराया।

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Mundan

पिछले चार-पांच वर्ष से, 13 अप्रैल – यानि बैसाखी के दिन सहारनपुर में पांवधोई नदी के तट पर एक मेला आयोजित किया जाने लगा है।  जो परिवार हरिद्वार या ऋषिकेश में गंगा तट पर जाकर अपने बच्चों का मुंडन संस्कार आदि कराया करते थे, वह यदि बैसाखी के दिन पांवधोई गंगा के तट पर ही  यह कार्यक्रम संपन्न करने लगे हैं तो इसका श्रेय पांवधोई बचाओ समिति, श्री रामलीला सम्पत्ति कमेटी, जिला प्रशासन, नगर निगम सहारनपुर और शहर के उन जागरुक नागरिकों को जाता है जो पिछले तीस-चालीस सालों में, गंदा नाला बना दी गई, पांवधोई गंगा नदी को उसकी खोई हुई गरिमा वापिस लौटाने के लिये प्रयास कर रहे हैं।

निरंतर प्रयासों के बावजूद पांवधोई गंगा अभी इतनी स्वच्छ तो नहीं हुई है कि उसमें स्नान किया जा सके, या उसके जल से आचमन किया जा सके, पर नगर निगम ने बैसाखी के पर्व पर गंगा स्नान का पुण्य अर्जित कराने के लिये अनोखा प्रबन्ध कर डाला है।  पानी के बड़े-बड़े टैंकर पांवधोई नदी के तट पर बिछाई गई अस्थाई पाइप लाइन से जोड़ दिये गये हैं और लोग गंगा में डुबकी न भी सही, टोंटियों से आ रहे जल में ही स्नान करके पुण्य अर्जित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, हरिद्वार से गंगाजल भी मंगाकर इन टैंकरों में डाला गया है ताकि सारे पानी में गंगाजल के गुण समाहित हो जायें।  “मन चंगा तो कठौती में गंगा!” watertap

इस अवसर पर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी पवन कुमार ने कहा कि हम किसी भी धर्म से संबंध रखते हो और देश में कहीं भी निवास करते हों लेकिन हमारी संस्कृति एक है और यही हमारी एकता की पहचान है। जिलाधिकारी ने मेला आयोजकों को इस सुन्दर प्रयास के लिये साधुवाद भी दिया।  नगर आयुक्त डा. नीरज शुक्ल ने मुख्य यजमान के रूप में गंगा पूजन किया।

बैसाखी मेले में जनता को आकर्षित करने के लिये खाने पीने के स्टाल के अलावा कृषि विभाग, शिवम सेवा ग्रामोद्योग संस्थान, अन्नपूर्णा फूड्स, पतंजलि व कृपाल आश्रम सहित अनेक संस्थानों ने अपने स्टॉल लगाये।  यही नहीं, न्यू कैंब्रिज स्कूल सुल्तानपुर चिलकाना,  जयमंगला जूनियर हाई स्कूल, ब्लू हैवन एकेडमी, एमटीएस पब्लिक स्कूल, नेशनल पब्लिक स्कूल व गुरुनानक इंटर कॉलेज के बच्चों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

इस साल मेले में एक प्रदर्शनी स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत को भी समर्पित है, जिसमें स. भगत सिंह, चन्द्र शेखर आज़ाद, राजगुरु, अशफ़ाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल आदि शहीदों की शहादत से युवा पीढ़ी को परिचित कराने का सार्थक प्रयास किया गया है।

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कार्यक्रम का विधिवत्‌ उद्‌घाटन नीदरलैंड से पधारी Water Resources Group की सुश्री ऐना ने फीता काट कर किया।  इस अवसर पर मंच पर जयनाथ शर्मा,  डा. पी.के. शर्मा, अमीर खान, डा. वीरेन्द्र आज़म,  डा. एस.के. उपाध्याय आदि  मौजूद रहे। डॉ.वीरेन्द्र आजम ने पांवधोई तट  पर बैसाखी मेले के आयोजन तथा बाबालालदास व हाजी शाह कमाल की मित्रता के इतिहास और फुलवारी आश्रम के महत्व से अतिथियों को अवगत कराया।  थे। कार्यक्रम का संचालन अमीर खां एडवोकेट ने किया।  कार्यक्रम में केएल अरोड़ा, सुशांत सिंघल, हरिओम बंसल, पंकज कर्णवाल, सुरेंद्र अग्रवाल, आशीष वैश्य ,डॉ.कुदसिया अंजुम, रामकुमार शर्मा, वसीम हैदर, संजय सैनी, जयसिंह, राजेंद्र सैनी, वीना बजाज सहित बड़ी संख्या में संभ्रान्त नागरिक उपस्थित रहे।

पांवधोई बचाव समिति, नगर निगम सहारनपुर और श्री रामलीला संपत्ति कमेटी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाने वाला ये मेला आने वाले समय में और लोकप्रिय हो सके और जन सामान्य के जीवन का अभिन्न अंग बन सके, यह इस बात पर निर्भर करता है कि पांवधोई नदी के जल को सहारनपुर वासी कितना शुद्ध और निर्मल कर पाते हैं।  पांवधोई सहारनपुर का विशेष गौरव व आकर्षण बन सकती है ।  जिस दिन पांवधोई गंगा के तट पर प्रातः सायं भ्रमण करने हेतु आने लगेंगे, इसके जल  में लोग निस्संकोच स्नान और आचमन करने लगेंगे,  जिस दिन स्वच्छ पानी की अस्थाई आपूर्ति हेतु पाइपलाइन की आवश्यकता नहीं रह जायेगी, उसी दिन से इस मेले के स्थायित्व और लोकप्रियता को लेकर भी कोई संशय शेष नहीं  रह जायेगा।

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