सांता क्लास

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अब की सेंटा क्लॉज़ गांव में मेरे आना, क्रिसमस डे इस बार हमारे साथ मनाना।

गिफ्ट बांटना सिर्फ शहर में ही जारी है, आते नहीं हो गांव, अजब सी लाचारी है।
मंदिर के पीपल को भी इस बार सजाना, बरगद पर भी पैन, पैंसिल खूब लगाना।
झोले में कॉपी, पुस्तक भरकर ले आना, अब की सेंटा क्लॉज़ गांव में मेरे आना।

कभी बांटना शर्ट- पैंट और कोट गांव में, और कभी टोपी टॉफी सी बैठ छांव में।
बैट-बॉल, फुटबॉल सभी हमको दिलवाना, कभी शहर के बच्चों से भी तो मिलवाना।
मुझको बस अपनी ऊंची टोपी दे जाना, अब की सेंटा क्लॉज़ गांव में मेरे आना।

बच्चों के संग फिक्र बड़े-बूढ़ों की करना, और दोस्त बन कभी किसी का हुक्का भरना।
सर्दी के मौसम में रहते सदा खांसते, देंगे शुभ आशीष तुम्हें सब हाथ कांपते।
मेरी दादी को को अपनी लाठी दे जाना, अब की सेंटा क्लॉज़ गांव में मेरे आना।

मातायें भी यहां बड़ी भोली-भाली हैं, सबका भरतीं पेट, मगर उनका खाली है।
कई लोग तो पी कर हरदम उधम मचाते, देते गाली खूब, कभी हैं हाथ उठाते ।
अपनी छड़ी घुमा कर सबका बैंड बजाना । अब की सेंटा क्लॉज़ गांव में मेरे आना।

– कश्मीर सिंह
अध्यक्ष, विभावरी
गोपाल नगर, सहारनपुर

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