पांवधोई गंगा – क्या हम इसे सहारनपुर का गौरव बनायेंगे?

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paondhoi02क्या आप जानते हैं कि आपका शहर भी आपका परिचय देता है? किस शहर में, किस कालोनी में आपका घर है, कैसा पड़ोस है, आस पास का वातावरण कैसा है – ये सारी बातें अन्ततः आपका भी परिचय बन जाती हैं। प्लाट खरीदने चलें तो उसका दाम भी इसी बात पर निर्भर करता है कि प्लाट कहां पर है। जितनी अच्छी कालोनी, उतना महंगा प्लाट! आखिर क्यों न हो? आपके पड़ोस को देख कर लोग आपके रहन सहन का, आपकी आदतों का अंदाज़ा लगाते हैं। आप खुद भी तो ऐसा ही करते हैं ?

फिर क्या कारण है कि आप ’गंगा के पवित्र तट पर’ रहने के बजाय ’गंदे नाले की बगल में’ रहना चाहते हैं ? क्यों आप अच्छी-भली पावन, शीतल जल-धारा को, जो हमेशा से आपके नगर की जीवन धार रही है, गंदा, बदबूदार सीवर बनाये हुए हैं? क्या मच्छर मक्खी और महामारी का भय आपको नहीं सताता ? अभी अपने घर की छत से क्या देखते हैं आप? काला बदबूदार पानी, कूड़े से भरी हुई पालिथिन की थैलियां, गन्दगी में मुंह मारते जानवर? क्या आपका मन इस गन्दगी में इतना रम गया है कि अब ये सब आपको दुःखी भी नहीं करता ? जरा सोचिये, अगर ये नदी सुन्दर और स्वच्छ हो जाये तो क्या आपकी भी शान नहीं बढ़ेगी? क्या आपकी जमीन, जायदाद की इज्जत व उसकी कीमत भी अपने आप नहीं बढ़ जायेंगी?

dhobighatकभी हरिद्वार में गंगातट पर सुबह शाम आरती होते देखी है? हम वही दृश्य अपनी पांवधोई गंगा के तट पर भी साकार होते देखना चाहते हैं। यही सपना आप भी दिन रात देखने लगें तो यह सपना नहीं, हक़ीकत बन जायेगा।

क्या सोच रहे हैं आप? ये शहर आपका, नदी भी आपकी! खुशियां आपकी, मान – सम्मान भी आपका। आपको क्या करना है – ये भी आप ही को तय करना है।

अपने शहर का, अपनी नदी का सम्मान करें, इसी में आपका भी सम्मान है।

मित्रों, यदि गंगा को बचाने में आपको भी रुचि है तो इस आंदोलन में कंधे से कंधा मिला कर साथ चलें। जन-जन को प्रेरित करें कि वह नदी में ठोस कूड़ा – कचरा न तो स्वयं डालें और न ही किसी और को डालने दें। जिस किसी के घर, दुकान, फैक्टरी से नाली आकर नदी में गिर रही हो, उसको बन्द कराने के लिये व्यावहारिक रास्ते तलाशें।

मित्रों, हम अपनी जिम्मेदारियों से मुंह छुपा कर, हर जिम्मेदारी सरकार की समझने लगे हैं, इसी का दुष्परिणाम हमारे सम्मुख आ रहा है। ये सरकार, ये नौकरशाही भी तभी काम करती हैं जब जनता जागृत होती है। मालिक सोया रहे तो नौकर कैसे जागते रह सकते हैं? अपनी भूमिका को पहचानिये। हम स्वयं बदलेंगे तो यह देश भी तभी बदलेगा। इसका प्रमाण यह है कि आप सब के द्वारा दिखाई गई जागरुकता के परिणाम स्वरूप जिला प्रशासन ने पांवधोई गंगा के पुनरुद्धार का प्रयास आरंभ किया है। कुछ वर्ष पूर्व जोगियान पुल से लेकर राकेश सिनेमा पुल तक नदी के दोनों किनारे पक्के किये गये थे, जनता कूड़ा करकट नदी में न डाल सके इसके लिये नदी पर फेंसिंग कर दी गई थी।
सहारनपुर के लोकप्रिय मंडलायुक्त को पांवधोई बचाओ आन्दोलन की ओर से ज्ञापन दिये गये जिसके परिणाम स्वरूप उन्होने सहारनपुर के लिये पांवधोई गंगा की महत्ता को स्वीकारते हुए इसके पुनरुद्धार का कार्यक्रम बनाया। इसके अन्तर्गत भूतेश्वर मंदिर से लेकर दाल मंडी पुल तक नदी के दोनों किनारों का सुदृढ़ीकरण किया गया। पुल खुमरान से लेकर दाल मंडी पुल तक नदी के दोनों तटों पर फेंसिंग की गई है।paondhoi01 पर सहारनपुर की जनता को अपने कर्तव्यों का अभी भी कोई भान नहीं हो पाया है। राकेश सिनेमा के निकट फेंसिंग को काटने की हरकत यह दिखाती है कि हमें अपने भले-बुरे का कोई ज्ञान नहीं है। सच तो यह है कि बिना फेंसिंग के यह नदी बहुत सुन्दर व आकर्षक प्रतीत होती पर नदी में निरंतर फेंका जा रहा कूड़ा विवश करता है कि बाड़ लगा कर इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जाये। यदि सहारनपुर के छात्र-छात्रायें व युवा इस मामले में दृढ़ निश्चय कर ठान लें कि हमें अपनी पांव धोई गंगा को साफ सुथरा रखना है तो यह कठिन दिखाई दे रहा कार्य सरल हो सकता है।

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