’नमक’ से जुड़ा ग़ज़ल लेखन में एक नया अध्याय

सुबोध लाल के ग़ज़ल संग्रह का हुआ सहारनपुर में लोकार्पण

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सहारनपुर : 1 मई : चार दशक लंबा शानदार कैरियर जिस में शिक्षक, लोक सेवक, कुशल प्रशासक, मीडिया परामर्शदाता और इन सब रूपों से अलग एक अद्‍भुत रूप – संवेदनक्षम कवि और शायर आदि भिन्न-भिन्न भूमिकाओं का सफल निर्वहन ! यही परिचय है ’नमक’ ग़ज़ल संग्रह के रचयिता सुबोध लाल ’साक़ी’ का! ’नमक’ उनका सद्यःप्रकाशित ग़ज़ल संग्रह है जिसका लोकार्पण सहारनपुर में होटल पंजाब के सभागार में सृजन प्रकाशन, इप्टा तथा संस्कार निधि द्वारा आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में हुआ।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विशिष्ट अतिथिगण
दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विशिष्ट अतिथिगण

लोकार्पण संयुक्त रूप से सर्वश्री सुशील अग्रवाल (इंडियन हर्ब्स), संजय गर्ग (पूर्व राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार), सुबोध लाल ’साकी’, प्रबोध लाल, अखिलेश प्रभाकर, एडीएम ओ.पी. वर्मा व क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी द्वारा किया गया।  इस क्षण के साक्षी रहे – पूर्व डीजीपी आलोक बी. लाल, श्री अशोक लाल, डा. सुरेश चन्द्र त्यागी, डा. रामशब्द सिंह, श्री सुधाकर अग्रवाल, श्री कृष्ण शलभ, डा. विजेन्द्र्पाल शर्मा, श्री मनीष कच्छल, डा. रमेश दत्त शर्मा, डा. वीरेन्द्र आज़म, श्री जावेद खान सरोहा, श्री कमल शर्मा, श्री सी. के. माथुर व नगर के सैंकड़ों गणमान्य साहित्यप्रेमी नागरिक।

मुख्य अतिथि श्री प्रमोद लाल, सुबोध लाल की जीवन संगिनी श्रीमती अनुभूति लाल, श्री सुशील अग्रवाल, मंच का संचालन कर रहे श्री अशोक लाल ने सुबोध ’साकी’ के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला व उनकी इस रचना से जुड़े विभिन्न मनोरंजक संस्मरण सुनाए। कार्यक्रम में सहारनपुर के प्रख्यात गायक संजीव झिंगरन, हरदीप सिंह और आस्था शर्मा ने बहुत मनमोहक व सुरीले अन्दाज़ में सुबोध लाल की कुछ ग़ज़लों को प्रस्तुत किया जिनका साथ तबले पर इकबाल तथा हार्मोनियम पर सुशील नाज़ ने बखूबी दिया।

श्री हरदीप को उनके गायन के लिये पूर्व डीजीपी आलोक लाल द्वारा सम्मान !
श्री हरदीप को उनके गायन के लिये पूर्व डीजीपी आलोक लाल द्वारा सम्मान !
आस्था शर्मा को ग़ज़ल गायकी के लिये स्मृति चिह्न देकर सम्मान !
आस्था शर्मा को ग़ज़ल गायकी के लिये स्मृति चिह्न देकर सम्मान !

’नमक’ में शायर ने अपनी चुनिन्दा 69 नज़्म व 60 ग़ज़लें शामिल की हैं। इनमें उनके किन – किन एहसासों से आपको परिचय मिलेगा, यह जानने के लिये शायर सुबोध ’साकी’ की ये रचना पर्याप्त है –
हालात, / इमकानात / जज़्बात, / नफ़्सियात, / जमालियात, / अदबियात, / रूहानियत, / रूमानियत, / तसव्वुरात, / तजरुबात, / तफ़क्कुर, / तसव्वुर, / फ़लसफ़े, / मसविदे, तमाम नातमाम / न इब्तेदा, / न इंतेहा, / आसमान ही आसमान, / उड़ान ही उड़ान, / तख़लीक़ी बाम, / और पर तोलता परिंदा / मैं !

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