जल प्रदूषण से मुक्ति तक संघर्ष जारी रहेगा – संजय गर्ग

संस्कार निधि ने मिर्ज़ापुर गांव में प्रदूषित जल के नमूने एकत्र किये।

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जल प्रदूषण के विरुद्ध संघर्ष का आह्वान करते पूर्व राज्यमंत्री संजय गर्ग
जल प्रदूषण के विरुद्ध संघर्ष का आह्वान करते पूर्व राज्यमंत्री संजय गर्ग

सहारनपुर – 5 जून :  पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था संस्कार निधि ने आज विश्व पर्यावरण दिवस पर जल प्रदूषण  से त्रस्त और हिंडन किनारे बसे कैंसर पीड़ित गांव मिर्जापुर जाकर कैंसर के कारणों की पड़ताल की और गांव के करीब पचास घरों से पानी के नमूने एकत्रित किये। बाद में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए संस्था के संयोजक व प्रदेश  के पूर्व राज्यमंत्री संजय गर्ग ने बताया कि इस नमूनों की देश की अलग-अलग लैबोरेट्री में जांच करायी जायेगी और आवश्यकतानुसार सर्वोच्च न्यायालय व एनजीटी में रिट दायर की जायेगी। उन्होंने कहा है कि हिंडन व कृष्णा नदी के किनारे रहने वाले गांवों के ग्रामीणों को प्रदूषित पानी के कारण मरने नहीं दिया जायेगा। ग्रामीणों ने कैंसर से मृत लोगों की सूची भी संजय गर्ग को उपलब्ध करायी।

अधिकारी शासन को गुमराह न करें

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संस्कार निधि द्वारा गांव मिर्जापुर में ‘जल प्रदूषण, जल जनित बीमारी एवं समाधान’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व राज्यमंत्री संजय गर्ग ने कहा कि कुछ फैक्ट्रियां मुनाफे की हवस में अपना केमिकल युक्त पानी नदियों में बहाकर मानव जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है, जिसके कारण लोग कैंसर से मर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले मिर्जापुर गांव में ही तीन दर्जन लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है और करीब एक दर्जन लोग अभी भी इस जानलेवा बीमारी से ग्रस्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण व स्वास्थ्य विभाग के अफसर शासन को झूठी सर्वे रिपोर्ट भेजकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं कि इन गांवों में कोई भी कैंसर पीड़ित नहीं है।   उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे लापरवाह व जन-स्वास्थ्य के प्रति उदासीन अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख़्शा नहीं  जायेगा।  उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि ये लड़ाई आगे भी जारी रहेगी और संस्कार निधि उन्हें शुद्ध  पेयजल उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने ग्रामीणों से संगठित होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

इंडिया मार्का जल पर भी भरोसा नहीं

प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ.एस के उपाध्याय ने ग्रामीणों को जागरुक करते हुए कहा कि लगातार बढ़ते प्रदूषण  से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है। उन्होंने कहा कि हिंडन व कृष्णा नदी इतनी प्रदूषित हैं कि यदि उसके पानी में डूबा हुआ कागज या प्लास्टिक जलायी जाती है तो उससे निकलने वाली गैस कैंसर तथा अन्य घातक बीमारियों को जन्म दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि इन गांवों में ग्रामीण अज्ञानतावश ऐसे कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि भूमि में लगातार प्रदूषित हो रहे जल के कारण अब इंडिया मार्का जल पर भी पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता।

जनहित याचिका दायर करेंगे

युवा अधिवक्ता पुण्य गर्ग ने नदियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए रिवर एक्ट बोर्ड के बारे में जानकारी दी और बताया कि कैंसर पीड़ित गांवों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जायेगी। डॉ.वीरेन्द्र आज़म ने ग्रामीणों से अपने जल स्रोतों को साफ-स्वच्छ रखने की अपील करते हुए कहा कि यदि हम अपनी बेटी की तरह नदियों, तालाबों व अन्य जल स्रोतों का ध्यान रखें तो  जल-जनित अधिकांश बीमारियों से छुटकारा मिल जायेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी अशिक्षित होने के बाद भी अपने जलस्त्रोतों को कभी प्रदूषित नहीं होने देते। डॉ. सौरभ राजपूत ने गांव के तालाबों और गांव में स्वच्छता तथा खुले में शौच से होने वाले नुकसानों के बारे में ग्रामीणों को प्रेरित किया तो बाल रोग विषेशज्ञ डॉ. स्वर्णजीत सिंह ने ग्रामीणों को बच्चों को स्वस्थ रखने के टिप्स दिए।

NSD सेल को जानकारी दें

एसीएमओ डॉ.ओपी सिंह ने संस्कार निधि को साधुवाद देते हुए कहा कि आज ये कार्यक्रम वहां हो रहा है जहां इसकी आवश्यकता थी वरना कुछ संस्थाएं बन्द ए.सी. सभागार में सेमिनार का आयोजन करके अपने कर्त्तव्य की इतिश्री समझ लेती हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। जिन गांवों में नलों का पानी पीने लायक नहीं था वहां रिबोर करने की संस्तुति की गयी है और कुछ गांवों में नल लगे भी है। डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में एनएसडी सैल चल रहा है यदि कहीं कोई ऐसी जानकारी मिलती है कि अमुक कारण से कैंसर या कोई जानलेवा बीमारी हो रही तो वहां इसकी जानकारी साक्ष्य सहित दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल पानी ही कैंसर का कारण नहीं है और भी कई कारण सामने  आ रहे है।

संस्कार निधि ने गांव में पौधे वितरित किये

ग्रामीणों को पौधे वितरित करते हुए संस्कार निधि के कार्यकर्त्ता
ग्रामीणों को पौधे वितरित करते हुए संस्कार निधि के कार्यकर्त्ता

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए रेहाना व उनकी साथी ने उद्‌बोधन गीत प्रस्तुत किया । इसके अलावा संस्था अध्यक्ष सुधीर जोशी, फादर डेनियल मसीह, के एन तिवारी आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर संस्कार निधि द्वारा ग्रामीणों को पौधे भी वितरित किये गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता ठा. वेदपाल सिंह ने तथा संचालन जावेद खान सरोहा ने किया। कार्यक्रम में डॉ.योगेश गुप्ता, रवि सिंघल, सुशांत सिंघल, सुनील गुप्ता, बी के कमल, गुलशन कपूर, अशोक गुप्ता, एडीओ रामपाल सिंह, ज्ञानचंद, बी आर मलिक तथा राजीव के अलावा ठाकुर कालेसिंह, रमेश ठाकुर, प्रधान इकराम, रतनसिंह, नकलीराम, ठा. रोहिताश्व, विनोद सिंह व देवीसिंह आदि बड़ी संख्या में ग्रामीण स्त्री – पुरुष शामिल हुए।

ये कैसा अनर्थ?

Mirzapur_22मिर्ज़ापुर गांव स्थित तालाब का सर्वे करने निकले सुशान्त सिंहल को एक दुकानदार ने बताया कि आम तौर पर तालाब का पानी धरती की विभिन्न तहों से धीरे – धीरे रिसता हुआ भूगर्भ जल में जाकर मिलता है और इस प्रकार भूजल का साफ पानी का स्रोत बार – बार भरता रहता है व उपयोग हेतु उपलब्ध होता रहता है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि मिर्ज़ापुर गांव में स्थित विशाल तालाब में बहुत गहरी बोरिंग कराई गई है, जिसका दुष्प्रभाव यह हुआ है कि तालाब का पानी धीरे-धीरे छनते हुए और रिसते हुए जाने के बजाय बोरिंग के कारण सीधे ही भूगर्भ स्थित स्रोत से जुड़ गया है और इस प्रकार भूगर्भ स्थित जल स्रोत भी उतना ही प्रदूषित है जितना कि तालाब का पानी! उन्होंने इस बात का भी दुःख जताया कि हर सुबह – शाम ग्रामीण अपने घर का कूड़ा करकट लाकर इस तालाब में उलट देते हैं। उन्होंने हर्ष व्यक्त किया कि ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से ग्रामीण जनता पर्यावरण संरक्षण व पानी के स्रोतों के महत्व को ठीक से समझ सकेगी और ऐसे काम नहीं करेगी जिनसे उनका अपना नुकसान हो!

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