डा. वीरेन्द्र आज़म के कुछ हाइकु

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प्रसिद्ध हाइकुकार डा. वीरेन्द्र आज़म की नवीनतम हाइकु रचनाएं आपके लिये हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।  कृपया अपनी प्रतिक्रिया (सराहना) अवश्य दें।

टूटा बिखरा
रिश्ता घर भर का
जरा बात से।

*

सूरज उगा
सूरजमुखी हंसा
शाम को रोया।

*

नयों को रास्ता
खुद ही गिर गये
पुराने पत्ते।

*

चौराहे पर
नचाती बंदरिया
पेट की भूख !

*
इनायतों से
कब चली ज़िन्दगी
खुद भी जूझो !

*

वृक्षों की छाया
जैसे बड़ों का साया
रख संभाल ।

*

बच्चों ने खर्चे
जब पैसे तो हंसी
पापा की जेब !

– डा. वीरेन्द्र आज़म

 

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