बसपा का किला ध्वस्त, मायावती की हालत पस्त !

सहारनपुर की चारों सीटें गवांई बसपा ने ! जाति-मज़हब की घटिया राजनीति को दुत्कार दिया मतदाताओं ने!

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-जिस सीट से मायावती दो बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंची वह  सीट भी नहीं बचा पायी बसपा
-(डॉ. वीरेन्द्र आज़म)

सहारनपुर में बसपा का किला भी मोदी लहर में ध्वस्त हो गया है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा को चार, कांग्रेस, भाजपा व सपा को एक-एक सीट मिली थी लेकिन इस बार के चुनाव में बसपा एक भी सीट नहीं बचा पायी है। यहां तक कि सहारनपुर देहात की उसकी सबसे मजबूत सीट भी इस बार कांग्रेस के मसूद अख्तर ने जीत ली है। इस सीट (तब हरौड़ा सु.) से 1996 व 2002 में बसपा सुप्रीमो मायावती चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंची थी। इसके अलावा सहारनपुर लोकसभा सीट से भी दो बार बसपा के सांसद चुनाव जीत कर संसद में पहुंचे हैं। वर्ष 1999 में मंसूर अली खां और 2009 में जगदीश राणा यहां से बसपा के टिकट पर सांसद रहे हैं। इतना ही नहीं वर्ष 1998 में मान्यवर कांशीराम भी बसपा के जनाधार को देखते हुए सहारनपुर से लोकसभा के चुनावी दंगल में उतरे  थे लेकिन तब उन्हें भाजपा के नकली सिंह से शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इस बार के चुनाव की एक विशेष बात यह भी रही कि तीन निर्वतमान विधायकों ने अपना सियासी गलियारा बदलकर चुनाव लड़ा था लेकिन जीत का सेहरा दो के सर पर ही बंध सका। गत 2012 के चुनाव में बेेहट सीट से महावीर राणा व नकुड़ सीट से डॉ.धर्मसिंह सैनी बसपा टिकट पर तथा प्रदीप चौधरी गंगोह सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे लेकिन इस बार तीनों ही भाजपा का झंडा लेकर मैदान में थे। सबसे बड़ा झटका बहुचर्चित और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद को  लगा है। जहां वह नकुड़ सीट से एक बार फिर अपने पुराने प्रतिद्वंदी डॉ धर्मसिंह से चुनाव हार गए है वहीं गंगोह सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे उनके भाई और गंगोह चेयरमैन नोमान मसूद भी विजयश्री का वरण नहीं कर सके। सियासी पंडित इमरान मसूद द्वारा गंगोह सीट से अपने भाई को चुनाव मैदान में उतारने के उनके फैसले को परिपक्व नहीं मान रहे थे। चूंकि इस फैसले से जहां सियासी नजरिये से उन्हें अपने परिवार के धुर विरोधी चौधरी यशपाल सिंह परिवार का विरोध झेलना पड़ा, वहीं चुनावी मैदान में उनके भाई नोमान को भी चौधरी परिवार के इंद्रसैन ने साइकिल चुनाव चिह्न लेकर जबरदस्त चुनौती दी। परिणाम ये हुआ कि इन दोनों परिवारों की टकराहट में  गंगोह और नकुड़ दोनों ही सीटों पर भाजपा अपना कमल खिला ले गयी।

यूं दलीय दृष्टि से देखें तो जिले की सात सीटों में से कांग्रेस के पास गंगोह की एक सीट थी लेकिन इस बार वह बेहट और सहारनपुर देहात के साथ दो सीट जीतने में कामयाब रही है। जबकि सपा ने गत चुनाव में देवबंद की एक सीट जीती थी, इस बार वह देवबंद न सही लेकिन सहारनपुर नगर सीट पर जीत का परचम लहराते हुए जिले में अपनी उपस्थिति बरकरार रखने में कामयाब रही है।

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