अदाकार ग्रुप द्वारा नाट्य श्रंखला का आयोजन

एक साथ तीन महिला निर्देशिकाएं ले कर आ रही हैं अपने अपने नाटक मंच पर !

0
331

सहारनपुर (22 अप्रैल) – पिछले 33 वर्षों से रंगमंच को एक कभी न रुकने वाली, कभी न थकने वाली अनवरत्‌ यात्रा बनाये चल रहे अदाकार ग्रुप ने आज आई एम ए भवन में एक साथ दो बेहतरीन नाट्य प्रस्तुतियां दीं। यूजी नोनी कृत जाल The Web जिसका निर्देशन नाट्य निर्देशन में पहला पहला कदम रख रही  नाज़मी अख़्तर खान ने किया, और मोहन राकेश कृत लघु नाटक बहुत बड़ा सवाल को मंच पर लेकर आईं नवोदित नाट्य निर्देशिका पूजा मित्तल !  अदाकार ग्रुप कल रविवार को दो और नाटक – आखिर कब तक? (निर्देशिका – वर्तिका वर्मा) तथा और गांधी खो गये (लेखक व निर्देशक – जावेद खान सरोहा की प्रस्तुति करने जा रहा है।  इस प्रकार अदाकार ग्रुप एक साथ चार नाटकों की श्रंखला, जिसमें तीन नाटकों का निर्देशन करने की जिम्मेदारी पहली बार तीन महिलाओं को दी गयी है, प्रस्तुत करके एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

जाल The Web

इस नाटक में प्रतिकूल परिस्थितियों की शिकार एक ऐसी महिला रोज़ के चरित्र का सजीव चित्रण किया गया है जो अपने ही शराबी और नाकारा पति स्टीव द्वारा शरीर बेचने के धन्धे में फंसा गयी है। वर्तिका वर्मा ने एक बीमार, हालात की शिकार मां, पैसे के लिये निरन्तर सताई जा रही महिला के इस चरित्र को बखूबी जिया है। घर में से रोज़ की पिटाई और उसके रोने – चिल्लाने की आवाज़ सुनकर उसकी रक्षा करने आ पहुंचे टिम मोरगन (सैयद मुज़तबा), इंस्पेक्टर की भूमिका में अनुज, हैड कांस्टेबल की भूमिका में सोहराब, कांस्टेबल की भूमिका में सुमित ने भी अपनी अपनी भूमिकाओं को जीवन्त करने का भरसक प्रयास किया है पर ये सभी रंगकर्मी पहली बार रंगमंच पर इस नाटक के माध्यम से पग रख रहे हैं अतः इनकी संवाद अदायगी व भाव भंगिमा में सुधार की काफी गुंजाइश है। मुख्य भूमिका में वर्तिका बहुत सशक्त अभिनय कर गयी हैं।

नाटक का एक और मजबूत पक्ष प्रकाश संरचना व पार्श्व संगीत संयोजन है जो करुण भावनाओं को उभारने में पूर्णतः सफल रहे हैं जिसके लिये जावेद खान सरोहा, संजीव झिंगरन व विक्रान्त जैन बधाई के पात्र हैं।  मंच सज्जा में minimalist approach रखी गयी है जो आकर्षित करती है।

रोज़ व स्टीव की भूमिका में वर्तिका वर्मा व नीतिश कुमार - जाल the web !
रोज़ व स्टीव की भूमिका में वर्तिका वर्मा व नीतिश कुमार – जाल the web !
टिम मोरगन व स्टीव के बीच में हाथापाई - सैयद मुज़तबा व नीतिश कुमार !
टिम मोरगन व स्टीव के बीच में हाथापाई – सैयद मुज़तबा व नीतिश कुमार !
रोज़ और टिम मोर्गन (वर्तिका एवं सैयद मुज़तबा)
रोज़, सैयद मुज़तबा, इंस्पेक्टर, हैड कांस्टेबिल एवं कांस्टेबिल
रोज़, सैयद मुज़तबा, इंस्पेक्टर, हैड कांस्टेबिल एवं कांस्टेबिल

बहुत बड़ा सवाल

आधुनिक यथार्थवादी हिन्दी नाटककारों में मोहन राकेश बहुत सशक्त हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनका लघु नाटक – बहुत बड़ा सवाल एक लोकप्रिय हास्य-व्यंग्य प्रधान नाटक है जिसमें सामाजिक / सरकारी संस्थाओं की कार्यशैली पर करारा व्यंग्य किया गया है।  गोष्ठियों में किस प्रकार मूल समस्याओं को परे सरका कर विभिन्न सदस्य किस प्रकार बात – बात पर व्यवस्था के प्रश्न उठाते हैं, अपना और दूसरों का  समय बरबाद किया करते हैं, मीटिंग के दौरान महिलाओं के साथ सेल्फी लेने में लगे रहते हैं, खर्राटे भरते रहते हैं, महिलाओं को किस प्रकार हेय व कमतर आंका जाता है, इसका बड़ा मनोरंजक चित्रण इस नाटक के माध्यम से किया गया है।

इस नाटक में शर्मा जी (प्रभाकर द्विवेदी),  गुरप्रीत (रितिका वालिया), संतोष (अनुषी अग्रवाल), मनोज (यासर सिद्दिकी), मोहन (पारस रंधावा), मि. कपूर (करण अनेजा), गुरप्रीत (सत्यपाल), नाज़िम खान (प्रेम प्रकाश), राम भरोसे (मौ. सुहेल), श्याम भरोसे (विमल शर्मा), दीन दयाल (योगेश धीमान) सभी अपनी अपनी भूमिका में जमे हैं।  नाट्य निर्देशिका के रूप में पूजा मित्तल के लिये पहला अवसर था, और रिहर्सल के दौरान उनके क्या अनुभव रहे, यह सब जानने की उत्सुकता हर किसी को रही, जो उत्सुकता ही बनी रही।  संभव है मुंबई में अपनी व्यस्तता के चलते वह इन नाटक की रिहर्सल हेतु समय नहीं दे पायीं हों और उनके स्थानापन्न के रूप में संभवतः सह निर्देशक पर ही अधिकांश जिम्मेदारी रही हो। कागज़ पर लिख कर दिये गये अपने नाटक के पात्रों और कलाकारों के  नाम भी वह बमुश्किल ही पढ़ पा रही थीं जबकि निर्देशक को तो अपने नाटक के हर पात्र के संवाद और भाव भंगिमा दिल में बसी हुई होती है।   निर्देशन चाहे जिसने भी किया हो, अदाकार ग्रुप की यह प्रस्तुति स्वयं में बहुत सफल रही है ।

इस अवसर पर योगिराज पद्मश्री डा. भारत भूषण, नगर विधायक व अदाकार ग्रुप के संरक्षक संजय गर्ग, प्रख्यात पर्यावरणविद डा. एस.के. उपाध्याय, अदाकार ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष जावेद खान सरोहा ने न केवल अभिनीत किये गये दोनों नाटकों पर अपने विचार रखे बल्कि रंगकर्म आंदोलन की महत्ता, व्यक्तित्व विकास में रंचमंच की भूमिका व महत्ता को भी रेखांकित किया।  कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी पवन शर्मा ने किया जो शीघ्र ही देवयानी का कहना है नाटक लेकर हम सब के बीच में आयेंगे।

सफल प्रस्तुति हेतु अदाकार ग्रुप से जुड़े सभी रंगकर्मियों को हार्दिक बधाई।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY