भाजपा ने सहारनपुर से की विकास पर्व की शुरुआत

मिशन 2017 स्टार्ट अप के साथ ही भाजपा ने किया चुनावी शंखनाद

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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में प्रधानमंत्री ने 26 मई की रैली से चुनावी शंखनाद कर दिया। उन्होंने सीधे चुनावी बात नहीं की लेकिन जिस अंदाज में उन्होंने अपने दो साल की उपलब्धियां गिनवाई उससे साफ है कि विकास पर्व के नाम पर की गयी यह रैली मिशन 2017 का स्टार्ट अप था। अलबत्ता उनके साथ आये गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीधे कहा कि अब यूपी में 14 बरस का भाजपा का बनवास समाप्त होना चाहिए। स्पष्ट बहुमत की सरकार बननी चाहिए। राजनाथ ने रैली में उमड़े जनसैलाब से अपील भी की कि वे प्रधानमंत्री को हाथ उठाकर इसका विश्वास दिलाएं। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार आयी तो चीनी मिलों से उनका पायी-पायी गन्ना भुगतान कराया जायेगा। पोपलर उगाने वाले किसानों को निराशा के भंवर से बाहर निकालते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आयेगी तो पोपलर की खपत के लिए फैक्ट्रियां भी लगवायी जायेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर बसपा का मजबूत किला है 2012 के विधानसभा चुनाव में इस जिले ने मायावती को चार विधायक दिए थे। खुद बसपा सुप्रीमो मायावती भी दो बार सहारनपुर से चुनाव जीत चुकी हैं। भाजपा बसपा के दलित वोटों में सेंध लगाना चाहती है, यहीं वजह है कि भाजपा ने 2017 के चुनावी शंखनाद के लिए सहारनपुर को चुना है।

भाजपा की विकास पर्व रैली में यूं तो हरियाणा व उत्तराखंड से भी काफी तादाद में भाजपा कार्यकर्ता अपने नेता को सुनने आए थे लेकिन वास्तव में यह रैली पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों की रैली थी। पष्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद जिले गन्ना बेल्ट के जिले है और भाजपा के रणनीतिकार ये बखूबी जानते है कि यदि गन्ना भुगतान से त्रस्त पष्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को भाजपा ये विश्वास दिला देती है कि केवल भाजपा ही उनकी समस्या का समाधान कर सकती है तो भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश का मिशन 2017 काफी आसान हो जायेगा। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पष्चिमी उत्तर प्रदेश की नब्ज पर हाथ रखते हुए अपना भाषण गांव, गरीब और किसान पर केंद्रित रखा।

प्रधानमंत्री ने पचास बरस पुराना यह सियासी जुमला दोहराया कि गांव-किसान खुशहाल होगा तो देश खुशहाल होगा। इसीलिए उनकी सरकार ने गांव-गरीब-किसान की खुशहाली के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ऐसी योजनाएं बना रही है कि जब 2022 में आज़ादी के 75 साल पूरे होंगे तो उनका लाभ दो गुणा हो जायेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल नारा नहीं है बल्कि हमने इसके लिए पहल की है। हमने मृदा स्वास्थय कार्ड बनवाने का अभियान चलाया है ताकि किसान को पता चल सके कि खेत में क्या कमी है और उसे कैसे दूर किया जाना है।

प्रधानमंत्री ने एक साथ कई निशाने साधते हुए कहा कि देश बदल रहा है लेकिन कुछ लोगों का दिमाग नहीं। अब इस काम को उन्होंने अपने हाथ में लिया है। उन्होंने किसानों की दुखती रग पर हाथ रखा। कहा, हमने गन्ना किसानों को ताकत देने का काम किया है, पहले केवल किसानों को गुमराह किया जाता था। गन्ना किसानों का चीनी मिलों की ओर करीब 14 हजार करोड़ रुपया बकाया था। इसके भुगतान की न चीनी मिलों को चिंता थी और न राज्य सरकारों को चिंता थी। हमने कोशिश की, गन्ना किसानों को समय से भुगतान मिले। अलग-अलग योजनाओं से गन्ना भुगतान कराया गया। प्रधानमंत्री ने चीनी मिलों को भी चेतावनी दी। मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का जिक्र करते हुए किसानों को हर तरह से रिझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यदि किसान को खेत में पानी मिल जाए तो यह मिट्टी सोना उगल सकती है, इसलिए जहां पानी का संकट है वहां की राज्य सरकारों से बात की जा रही है। मोदी यह कहते हुए किसानों को जल संरक्षण का मंत्र दे गए कि इस बारिश में जितना पानी बचा सकते हो बचाएं। खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इक्कीसवीं सदी में भी देश के 18000 गांवों में बिजली नही थी लेकिन हमने 7000 गांवों में बिजली पहुंचाने का काम किया और बाकि गांवों में भी जल्दी ही बिजली पहुंचायी जायेगी।

प्रधानमंत्री ने गरीबों को भाजपा की छत के नीचे लाने की कोशिश करते हुए कहा कि जब मुझे एनडीए का नेता चुना गया था तो मैंने कहा था कि मेरी सरकार देश के गरीबों को समर्पित है। खुद को देश के सवा सौ करोड़ लोगों का प्रधान सेवक बताते हुए मोदी ने कहा कि कोई मां-बाप यह नहीं चाहता कि उसकी संतान को विरासत में गरीबी मिले। दो साल के हमारी सरकार के कामों को देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि हमने उन कामों को हाथ में लिया है जो गरीबों को गरीबी से लड़ने की ताकत देते हैं। मोदी ने महिलाओं और युवाओं को भी भगवा ध्वज के नीचे लाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पुरुषों की तुलना में बेटियां कम पैदा हो रही है, चूंकि उन्हें गर्भ में ही मार दिया जाता है। इसीलिए हमने बेटी पढ़ाओं-बेटी बचाओं अभियान चलाया है। उन्होंने कहा कि गरीब महिलाएं लकड़ी में चूल्हा जलाकर अपने फेफडे़ खराब कर रही थी। लेकिन हमने पिछले एक साल में तीन करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन दिए हैं और आने वाले पांच सालों में पांच करोड़ लोगों को और गैस कनेक्शन दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण का इतना बड़ा कार्यक्रम आज़ादी के बाद पहली बार देश में चला है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए। बैंक गरीबों के काम आने चाहिए,बैंक वाले पैसे नहीं देते थे ,डरा देते थे। हमने बैंकों से सहायता की व्यवस्था की है। अब तक सवा तीन करोड़ परिवारों को सवा लाख करोड़ से अधिक की राशि बिना गारंटी दी गयी है। गरीबों की ताकत कैसे बढ़ाई जाती है ये हमने कर दिखाया है।

प्रधानमंत्री रैली की एक विशेष बात ये रही कि जिस सहारनपुर जिले के दारुल उलूम देवबंद से भारत माता की जय के खिलाफ उलेमाओं ने फतवा दिया था उसी जिले में रैली की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से भारत माता की जय का उद्घोष कराकर की।  जिस सहारनपुर से कांग्रेस के एक नेता ने उनकी बोटी-बोटी काटने का संकल्प जताया था मोदी ने उसी सहारनपुर से चुनावी शंखनाद किया। इस तरह मोदी ने अपने विरोधियों को चुनौती भी दे दी और भविष्य के लिए अपनी मंशा भी साफ कर दी।

भाषण की एक दूसरी खासियत ये रही कि प्रधानमंत्री ने सपा, बसपा, कांग्रेस या अन्य किसी दल तथा किसी नेता का नाम लेकर उन पर सीधा हमला नहीं किया। अलबत्ता इशारों में उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस  और गन्ना भुगतान के मुद्दे पर प्रदेश की सपा सरकार को कटघरे में जरुर खड़ा किया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान हर संप्रदाय और जाति-धर्म के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। उन्होंने कहा कि हर योजना को जाति, संप्रदाय या वोट बैंक से जोड़ने का एक फैशन सा हो गया है, लेकिन मेरे लिए सवा सौ करोड़ देशवासी ही मेरा परिवार है। न जात है, न पात है, न पंथ है, न संप्रदाय है, हमने सभी देशवासियों की भलाई के लिए काम किया है। मोदी ने अपनी सरकार के दो साल के बेदाग कार्यकाल पर भी जनता से  मुहर लगवायी। कहा, दो साल पहले अखबारों के पन्नों को याद करिए, आज सरकार में बैठकर देखता हूं तो यह देखकर चौंक जाता हूं कि कितना पैसा लूट लिया गया। मैंने ये लूट बंद करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने लोगों से सवाल किया कि क्या आपने कोई खबर ऐसी सुनी क्या कि मोदी सरकार ने एक रुपया  भी खाया हो, क्या किसी अखबार में ऐसा कुछ छपा क्या, क्या किसी टीवी ने दिखाया क्या! भीड़ से हर बार आवाज़ नहीं-नहीं की आयी।

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