एशिया का सबसे साफ व सुन्दर गांव मेघालय में

क्या हम सहारनपुर वासी भी इस गांव से कुछ शिक्षा लेंगे ?

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मुझे आज अपने एक घुमक्कड़ ब्लॉगर मित्र ’मनु प्रकाश त्यागी’ की पोस्ट के माध्यम से पता चला कि मेघालय में एक गांव है – Mawlynnong जिसे – एशिया का सबसे साफ सुथरा गांव – के रूप में पुरस्कार मिला है। कृपया ध्यान दें – अपने जिले का, मेघालय का, या भारत का नहीं – पूरे एशिया में सबसे साफ सुथरा गांव! हद है भई !!!

हां तो Mawlynnong मॉलिनौंग गांव के निवासियों की उन ’बुरी आदतों’ के बारे में भी जान लीजिये जिनकी वज़ह से उनके गांव को यह अद्‌भुत उपलब्धि हासिल हुई है – मनु त्यागी लिखते हैं –

“गांव स्व्च्छ कैसे है और वो भी एशिया में इसका कारण ये है कि गांव में जगह जगह लकडी की बनी शानदार डस्टबिन रखी हैं । जगह जगह पब्लिक टायलेट बने हैं । इन सबका संचालन गांव वाले मिलजुल कर करते है । गांव में सभी जगहो पर शाम को सफाई अभियान चलता है जिसमें गांव का प्रत्येक आदमी , औरत और छोटे से छोटा बच्चा भी हिस्सा लेता है । यहां पर छोटे से छोटे बच्चे को जन्म से ही सफाई सिखायी जाती है इस हद तक कि अगर वो रास्ते से गुजर रहा है और उसे छोटा सा कागज या पत्ता भी गिरा दिखे तो वो उसे उठाकर डस्टबिन में डाल देता है। गांव में कूडा इकठठा करने के बडी जगह भी बनी हैं । गांव में पालिथिन का प्रयोग प्रतिबंधित है ही साथ ही धूम्रपान भी वर्जित है।
गांव में एक कैफे भी बना है जहां पर चाय और स्नेक्स आदि मिल जाते हैं । गांव के सभी बंदो ने अपने अपने घर के बाहर फूलो की बढिया प्रदर्शनी रखी है जो दूसरे घरो से होड करती दिखायी देती है।
गांव में करीब सौ परिवार हैं । ये गांव आपसी समझ और समुदायिता का बहुत बढिया उदाहरण है । गांव के लोगो का मुख्य पेशा खेती ही है। यहां पर ढूंढने पर भी आपको कचरा नही पडा मिलेगा।”

मनु त्यागी ने हमें इस गांव के कुछ चित्र भी अपनी यात्रा वेबसाइट http://www.travelufo.com पर शेयर किये हैं जिनमें से दो चित्र हमें उस गांव का विहंगम परिचय देने के लिये पर्याप्त हैं –

मनु त्यागी द्वारा travelufo.com पर लगाया गया चित्र
मनु त्यागी द्वारा अपनी वेबसाइट travelufo.com पर लगाया गया चित्र

विकीपीडिया के अनुसार, ्मॉलिनौंग गांव में 500 लोग रहते हैं और कुल 95 परिवार हैं। शिलौंग से 95 किमी दूर स्थित इस खासी गांव में साक्षरता दर 90% है।

अब अगर इसकी तुलना हम अपने सहारनपुर शहर के निवासियों से करें तो देखते हैं कि हमारी निगाह में पूरा शहर एक कूड़ेदान है जहां सड़क पर कहीं भी कूड़ा फेंका जा सकता है, गुटका – तंबाकू खाकर दिन भर उसकी पीक सड़क पर मारी जा सकती है।

सहारनपुर वासियों को सफाई कर्मी को कूड़ा देने के बजाय सड़क पर फेंकना ज्यादा पसन्द है।
सहारनपुर वासियों को सफाई कर्मी को कूड़ा देने के बजाय सड़क पर फेंकना ज्यादा पसन्द है।

सफाई सिर्फ और सिर्फ नगर निगम की जिम्मेदारी है क्योंकि ” हम नगर निगम को टैक्स देते हैं !” (पता नहीं ऐसा कितना टैक्स देते हैं जिसका एहसान दिखाते रहते हैं हम लोग! ) वैसे हमारी नगर निगम भी कोई कम नहीं है ! सड़क पर कूड़ा फेंकना नगर निगम के स्वनामधन्य अधिकारियों ने ही सिखाया है सहारनपुर वालों को ! हमारी नगर निगम ने ही तो सड़क पर जगह जगह खुले आकाश के नीचे कूड़ा संग्रह केन्द्र बना रखे हैं!

अति व्यस्त बोमन जी रोड पर नगर निगम में कई सारे कूड़ा संग्रह केन्द्र बनाये हुए हैं, उनमें से ही एक कूड़ाघर !
अति व्यस्त बोमन जी रोड पर नगर निगम में कई सारे कूड़ा संग्रह केन्द्र बनाये हुए हैं, उनमें से ही एक कूड़ाघर !

सच तो ये है कि लोकतंत्र में लोक यानि जनता का ही सबसे अधिक महत्व होता है। जैसी जनता होती है, उसे वैसे ही शासक और प्रशासक मिलते हैं। जिस दिन सहारनपुर की जनता को गंदगी के बजाय सफाई से प्यार हो जायेगा, उस दिन नगर निगम के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की इतनी हिम्मत नहीं होगी कि वह शहर की सड़कों को कूड़ाघर समझ सकें! क्या हम कभी जागेंगे?

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